Monday, 11 April 2016

जय माते जगदम्बे

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माँ दुर्गा अम्बा जगदम्बा
तेरी अनंत रूप रेखा
कद तेरा आकाश से ऊँचा
कण कण रूप तेरा देखा

मस्तक है आकाश तेरा
चरण तेरा है वसुंधरा
धर्म कर्म तेरे दो करतल
भुजा दिशाओं की रेखा

पवन स्वांस उच्छवास है
तेज धुप रंगत तेरा
शर्दी की पुरवाई ममता
गर्मी तन का ताप तेरा

काया तेरी भोर की लाली
साम सुहानी है छाया
बदरी है तेरा आँचल माँ
वर्षा ऋतू करुणा माया

दया भरी सागर सी आँखे
सूरज है टीका तेरा
चाँद सितारे जेवर गहना
राषि नक्षत्र गलहार तेरा

विजय पताका बादल तेरा
विजली है गर्जन तेरा
शितल हिम स्वभाव तेरा
क्रोध अग्नी ज्वाला तेरा

जल थल पर्वत तन तेरा है
रात अँधेरी केश तेरा
दया कृपा तेरी झरना सा
भक्ती भाव निर्मल धारा

पूर्ण ब्रम्ह समाया तुझ में
सारी सृष्टि तेरी माया
तू ही है कारक संहारक
जन्म मरण फेरा तेरा

तू ही पालक अन्नपूर्णा है
तू हरती सबकी बाधा
तू है 'योगी' की आराध्या
तूझपर भक्ती भाव श्रद्धा

🌹🌹🌹

"योगी योगेन्द्र "
9768000078

12:04:2016

🌹 "सुप्रभात मित्रों" 🌹
              हरि ॐ
               🙏

Thursday, 7 April 2016

आज का भजन

      " मातृ वन्दना "

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जय जगदम्बे दुर्गे अंबे
जननी जगत दुलारी
दयामयी अष्टभुजी माँ
आदि शक्ति अवतारी

हे महा देवी भक्त सनेही
कृपा करो महतारी
हे शिव शक्ति दक्ष दुलारी
ममतामयी सुनारी

हे आराध्या रोको बाधा
हे शुभ मंगलकारी
सिंह वाहिनी ज्वालादेवी
रक्षा करो हमारी

खल द्रोही आतंकवाद से
रोवत दुनियां सारी
धरो वेग हे गरुण वाहिनी
मार दो अत्याचारी

तुम ही शक्ति स्वरुपा देवी
सामर्थवान तुम नारी
दौड़ो हे महिषासुर मर्दिनी
लेकर खड्ग कटारी

करो जगत कल्याण हे माते
सुनो पुकार हमारी
जग पर दया कृपा बरसाओ
धन से भरो अटारी

धन यश दौलत सुख समृद्धि
शक्ति विजय दो प्यारी
'योगी' को दो परम भक्ती माँ
जग जननी कल्याणी

🌹🌹🌹

"योगी योगेन्द्र "
9768000078

08:04:2016

सभी रिश्तेदारों सहयोगियों
मित्रों को गुढी पाडवा की
हार्दिक शुभेक्षा

और

नूतन वर्ष की
मंगल कामनाएँ

माता रानी आप सभी
की सभी इच्छाएँ पूर्ण करें

🌹 "सुप्रभात मित्रों" 🌹
              हरि ॐ
               🙏

Sunday, 20 March 2016

शिव जी की होली


             

        "होली भजन"
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शिव शंकर भूतनाथ की
आई गजब की होली
फागुन माह भक्त बन गाए
शिव बखान की होली

सकल जगत रंगीन हुआ
जल थल में रंगोली
कंकण कंकण नाचे बन
रंग बिरंगी गोली

नन्दी कार्तिक रूद्र गण
गौरा गणेश की टोली
भुत धुत अवधूत अघोरी
अलग अलग है टोली

कोई रंग गुलाल उड़ाता
भैरो अबीर की झोली
गणेश पिचकारी ले दौड़े
भाग रही सब टोली

दूध मिठाई संग ठंडाई
झूम रही सब टोली
पी पी कर सब बौराये है
गांजा भांग की गोली

होली की हुड़दंग मची है
होती मस्त ठिठोली
डम डम डमरू बाज रहा
बम बम निकले बोली

दया कृपा करुणा खुसी का
भोला उड़ेलते झोली
दुःख दरिद्र संताप ताप की
मार भगावत टोली

लोगों को सुख बाँट रहे है
पीकर खुद विष गोली
इसीलिए शिवजी कहलाते
भोला भंडारी चंद्रमौली

अर्पित करता भांग धतूरा
चम्पा बेल चमेली
महादेव जी की शरण में
"योगी" गावत होली

🌹🌹🌹

"योगी योगेन्द्र "
9768000078

21:03:2016

   🌹 "सुप्रभात मित्रों" 🌹
              हरि ॐ
               🙏

Sunday, 14 February 2016

"शिव भजन"


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शिव को कहाँ खोजता बन्दे
शिव अखिल जीवन में
शिव मंदिर में शिव मूरत में
शिव हैं घर आँगन में

अंदर बाहर दसो दिशा शिव
शिव ही है कण कण में
शिव पर्वत हैं शिव मरुस्थल
शिव सागर नदियों में

शिव ही शिव हैं जड़ चेतन में
शिव ही सृष्टि सृजन में
साँसों में शिव प्राणों में शिव
शिव ही पूर्ण जगत में

पंचतत्व बन सामिल तन में
शिव ही इन्द्रिय मन में
नभ जल थल अग्नि पवन में
स्वयं प्राण शिव तन में

जन्म मृत्यु में जीवन में शिव
शिव सामिल पल पल में
पालक हैं शिव शिव संहारक
शिव आधार प्रलय में

स्वर व्यंजन अक्षर में शिव
शिव शब्द अर्थन में
शिव कल्पना भाव भावना
शिव भाव संगम में

हे शिव पालनहारी जग के
बसो मेरे तन मन में
"योगी" के जीवन में सामिल
शिव हैं भक्ति भजन में

🌹🌹🌹

"योगी योगेन्द्र "
9768000078

15:02:2016

        🌹 "सुप्रभात मित्रों" 🌹
                    हरि ॐ
                      🙏

Saturday, 13 February 2016

श्री गणेशाय नमः

~•◆●■★”गणेश वंदना”★■●◆•~

प्रथम पूज्य श्री गणेश
आमंत्रित हो नाथ
शुभ लाभ ऋद्धि शिद्धि
को ले आओ साथ

जै गणेश जै गणपति
मन मंदिर में वास
घर आँगन में आ बसो
लक्ष्मी जी के साथ

मंगल हो कल्याण हो
पूरण हो सब काम
श्री गणेश की आरती
मंत्र सफलता मान

जय गणेश जय गणपति
सुन्दर तेरा नाम
संसार उद्धार का सदा
करो तुम काम

उदर विशाल कान बड़े
लम्बोदर है नाम
मुख छोटा मस्तक ऊँचा
चरण कमल समान

गौरी नंदन अभिनन्दन
मूषक पर आरूढ़
शिव के पुत्र गजानना
जै जै जै गजमुख

बुद्धि ज्ञान के देवता
दूर करो अज्ञान
हे दुखहर्ता हे सुखकर्ता
तेरी हम संतान

दुःख में दुनिया डूब रही
भेजो सुख की नाँव
छाया हुआ संताप ताप
तुम हो ठंडी छाँव

हे गणनायक शिद्धिविनायक
सुन्दर तेरा नाम
विघ्नविनायक अष्टविनायक
दो “योगी”पर ध्यान